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नमस्कार आज हम बात करने जा रहे हैं ऐसे सख़्श का जो भारत के राजनीति ही नहीं बल्कि पुरे विश्व के चर्चा का केंद्र बन चुके हैं जिनका नाम आज भारत ही नहीं बल्कि पूरा संसार में गौरव के साथ लिया जा रहा है। जी हाँ आप बिलकुल ठीक समझे हम बात कर रहे हैं भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंदर मोदी जी के बारे में । मित्रों आप सभी सोच रहे होंगे की ऐसा क्या है श्री नरेंदर मोदी जी के कुंडली में की वो लगातार गुजरात के मुख्य मंत्री बने और अब भारत के प्रधानमंत्री बने। वो भी 1984 के बाद पूर्ण बहुमत के साथ। ऐसे कौन से योग हैं जो इनको जनता विश्व में इतनी बड़ी ख्याति मिली और दिन पर दिन इनकी लोकप्रियता बढ़ती ही जा रही है। तो आये आज हम करते हैं इनके कुंडली का कुंडली दर्शन। इनका जन्म 17 सितम्बर 1950 को 11 :50 मिनट सुबह को मेहसाना गुजरात हुआ है। अब इनकी कुंडली वृश्चिक लग्न और वृश्चिक राशि की ही बनती है। और लग्न में चन्द्रमा और मंगल हैं जो चन्द्र मंगल योग लगाते हैं। सबसे पहले आपको ये जानना जरूरी है की ये योग ज्योतिष शास्त्र में बहुत ही पवित्र और लक्ष्मी कारक योग माना जाता है। इस योग के कारण इनकी ख्याति और मान सम्मान में विर्धि करती है। अब बात करते हैं लग्न में स्वराशि का मंगल के बारे में। मंगल जो पराक्रम ,साहस ,ऊर्जा ,और सेनापति का कारक माना जाता है और जब मंगल स्वराशि के हो तो ऐसे में मान सम्मान भी दुगना कर देता है। पराशर मुनि बताते हैं की जिनका लग्न और लग्नेश अच्छा हो उसकी पूरी कुंडली अपनेआप अच्छी हो जाती है। अब आप को पता चल गया होगा की मोदी जी 18 घंटे कैसे काम कर लेते हैं और काम करने के बाद भी इनको थकान क्यू नहीं महसूस होती है। सिर्फ मंगल के कारन क्यू की इनका मंगल अपने राशि का और लगनेश हैं इसलिए। अब मंगल के कारण ही इनको एनर्जी देता है और ज्योतिष में मंगल को सेनापति माना जाता है। आप भी जानते हैं की राजा चाहे जितना भी अच्छा हो अगर सेनापति कुशल नहीं हो तो कोई युद्ध नहीं जीत सकते हैं। यही कारन है की बड़े, बड़े प्रतापी राजा के सेनापति बहुत बहादुर और पराकर्मी हुआ करते थे। चाहे आप महाभारत में भीष्म पितःम्ह या फिर सिकंदर सेनापति के सेलुकस निकटोर को देख लें। अब आप सोच सकते हैं की भारतीय जनता पार्टी जैसे इनको अपना सेनापती नियुक्त् किया सभी लोग सोच रहे थे की भारतीय जनता पार्टी तो केवल हिंदी भाषी और शहरी क्षेत्र की पार्टी है इनको देश भर में बहुमत कैसे मिलेगी। लेकिन मोदी जी ने अपने मेंहनत और जनता से सवांद स्थापित करके भारतीय जनता पार्टी को अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि दिलाई। अब बात करते हैं कुंडली में बनने दूसरे योग के बारे में जिनका नाम है इनके कुंडली में बनने वाले गजकेशरी योग। गज मतलब हाथी और केशरी मतलब शेर। हाथी मतवाले चाल जाना जाता है चाहे कोई भी जानवर जितना मर्जी पीछे पड़ा हो वो सिर्फ अपने लक्ष्य के तरप बढ़ता रहता है और शेर जो रहता तो चुप है लेकिन जब दाहरता है तो सब अपने बिल में दुबक जाते हैं। अब आप सोच सकते हैं की गजकेशरी योग के कारण मोदी जी कैसे अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित बिना किसी से डरे आगे बढ़ते ही रहे। बहुत सारे लोगो के नज़र में बुरे होने के बाद भी जनता ने उन्हें कैसे देश का गौरव बना दीया। और ये गजकेशरी योग का ही प्रभाव ही है की इतने सरे झूठे लाँछन लगने के बाद भी वो सच्चा सोना बनकर बाहर निकले। अब आप लोगो में से बहुत सारे लोग ये बोलते हैं की मोदी जी धार्मिक बहुत हैं इसका कारण हैं की ऐसा क्या है जो इनको धार्मिक बल्कि देश भक्त भी बनाता है ?इनकी कुंडली में गुरुः कुंडली के चौथे भाव शनि के राशि हैं और गुरु ,शनि की आपस दृष्टि संबद्ध है। ज्योतिष में चौथा भाव माता ,जनता ,और मातृभूमि के लिए जाना जाता है। अब आप सोच सकते हैं की चौथे भाव में गुरु जैसे शुभ के ग्रह बैठने से इनको अपने माता से कितना प्यार है की आज इतने बड़े और प्रधानमंत्री होने के बाद भी अपने माँ से कितना प्यार करते हैं। और यही कारन है की वो अपने देश से भी इतना ही प्यार करते हैं तभी तो बोलते हैं की मैं देश नहीं झुखने दूंगा मैं देश नहीं मिटने दूंगा। गुरु और शनि के आपस में दृष्टि संबंध होने के कारण इनको अपने धर्म प्रति धार्मिक बनाता है। क्यू की गुरु धर्म और शनि पराशक्ति मालिक भी है और आप भी जानते हैं की ये बहुत बार खुद बोल चुके हैं कि मेरा तो किसमत भी ऐसा की ऊपर वाला हमें थोड़ा नहीं देता है वो हमें तो बहुत देता है। मतलब ईश्वर का आशीर्वाद भी इनके साथ है। और गुरु और शनि देव के कारण जनता भी इन पर पूरा विश्वास करता है। अब बात करते हैं इनके शादी के बारे में आप सभी जानते हैं की इनका बचपन में शादी हो गयी लेकिन क्या कारन है की इतने अच्छे इंसान अपनी पत्नी को अकेला छोड़ दिए। तो इसके लिए हमे इनके सातवे घर और उनके स्वामी को देखना होगा सातवा घर जिसपर छठे घर का मालिक की दृष्टि है और केतु दृष्टि है इतना ही नहीं सातवें स्वामी शुक्र ,शनि देव के साथ युति कर के हैं। ज्योतिष में शनि अलगाव बहुत बड़े कारक माने जाते हैं। अब सोचे शुक्र और शनि पर गुरू के दृष्टि होने से वो अलग भी हुए तो देश भक्ति कारण। क्यू की इनको तो वैसे भी भारत माँ क़र्ज़ चुकाना था। अब बात करते हैं की ऐसा क्या है जनता इनको सुनती है विस्वाश करती है। इसका कारन है है सूर्य और बुध का एक साथ एक राशि में होना। सूर्य एक साथ होने से बने योग के कारन जनता बातो पर विस्वास होता है। और अब बात करते हैं आखिर ऐसा कौन दशा मिली इनको ये प्रधानमंत्री बने ?आप सभी जानते हैं की 2011 से ही इनके नाम की चर्चा शुरू हो गई थी। 21 मार्च 2011 से इनको चन्द्रमा की महादशा 10 साल मिली है जो इनका भाग्य स्थान स्वामी है और लगन में केंद्र में बैठे हैं और और 18 फरवरी 2014 में इनको चन्द्र की महादशा में गुरु अन्तर्दशा मिली जब देश में चुनाव हुए गुरु पंचम के स्वामी और चन्द्र भाग्य स्थान के स्वामी और दोनों ही केंद्र में बैठे हैं इनको केंद्र आने से दुनिया की कोण सी ताकत रोक सकती थी। हा समस्या जरूर होगी क्यू चन्द्र इनका नीच का है लेकिन अगले 10 साल तक चन्द्रमा की दशा इनको और भी लोकप्रिय प्रधानमंत्री बनाएंगे। और अब भारत को विश्र्व गुरु बनने से कोई रोक नहीं सकता है।